• Sat. Jan 17th, 2026

Rishikesh: ऐतिहासिक धरोहर चौरासी कुटिया मूल स्वरूप में दोबारा सजेगी, बीटल्स ग्रुप के साथ जानें पूरा इतिहास


[responsivevoice_button voice=”Hindi Female”]

Spread the love

चौरासी कुटिया का जीर्णोद्धार हो रहा है लेकिन इसके मूलरूप में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया जा रहा है। उम्मीद है कि जल्द ही चौरासी कुटिया अपने मूल स्वरूप में भव्य और दिव्य नजर आएगी। कार्यदायी संस्था का कहना है कि करीब डेढ़ वर्ष के भीतर कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा।

चौरासी कुटिया को पर्यटन हब के रूप में विकसित करने की योजना पर कार्य शुरू हो गया है। राजाजी टाइगर रिजर्व प्रशासन की ओर से भेजे गए प्रस्ताव को शासन से स्वीकृति मिलते ही चौरासी कुटिया (बीटल्स आश्रम) का जीर्णोद्धार का कार्य शुरू कर दिया गया है।

भवन का जीर्णोद्धार किया जा रहाकरीब 92 करोड़ रुपये की लागत से इस ऐतिहासिक धरोहर को मूल स्वरूप में कोई परिवर्तन किए बगैर भव्य बनाया जा रहा है। योजना के तहत चौरासी कुटिया में कैफे, हर्बल गार्डन, योग–ध्यान हॉल, पौराणिक रसोई घर और बैंक भवन का जीर्णोद्धार किया जा रहा है।

राजस्थान सहित विभिन्न राज्यों से आए अनुभवी कारीगर 84 ध्यान कुटियों की मरम्मत कार्य कर रहे हैं। वहीं क्षतिग्रस्त सत्संग हॉल को भी पूरी तरह से सजाने संवारने की तैयारी है। पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रवेश और निकासी के लिए दो नए गेट, नया टिकट काउंटर तथा वाहन पार्किंग की व्यवस्था भी विकसित की जा रही है।

चौरासी कुटिया का इतिहास

वर्ष 1961 में महर्षि योगी ने करीब 7.5 हेक्टेयर भूमि पर आश्रम बनाया था। इस आश्रम को चौरासी कुटिया के नाम से जाना जाता है। वर्तमान में यह क्षेत्र राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क के गोहरी रेंज में आता है। आश्रम में 140 गुंबदनुमा और 84 ध्यान योग कुटिया हैं। वर्ष 2000 में वन विभाग ने इस आश्रम का अधिग्रहण कर लिया था लेकिन रख रखाव के अभाव में यह आश्रम जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है।

बीटल्स ग्रुप ने ली थी यहां भावातीत ध्यान की दीक्षा

अमेरिका के प्रसिद्ध बैंड बीटल्स ग्रुप के सदस्य यहां एक साल रहे थे। वर्ष 1967-68 में ग्रुप के सदस्य जॉन लिनोन, पॉल मेकार्टनी, जार्ज हेरिशन व रिगो ने यहां भावातीत ध्यान की दीक्षा ली। इस दौरान उन्होंने 48 गीतों की रचना की। इन गानों को दुनिया भर में खूब सराहा गया, जिनमें से 18 गानों को बीटल्स बैंड की प्रसिद्ध एल्बम द व्हाइट में शामिल किया गया था। इसके बाद से ही इसे बीटल्स आश्रम के नाम से भी जाने जाना लगा। इस आश्रम को पर्यटन के मानचित्र पर स्थापित किए जाने के लिए स्वर्गाश्रम क्षेत्र में तीन दिवसीय बीटल्स महोत्सव का आयोजन भी किया गया था। तब प्रशासन ने इस महोत्सव को हर वर्ष आयोजित करने की बात कही थी।

कौन थे महर्षि योगी

महर्षि महेश योगी, भावातीत ध्यान के प्रणेता थे। इनका असली नाम महेश प्रसाद वर्मा था। इनका जन्म 12 जनवरी 1918 में छत्तीसगढ़ के राजिम शहर के समीप पांडुका गांव में हुआ था। इन्होंने 1942 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से भौतिकी में डिग्री प्राप्त की थी। फिर महर्षि महेश योगी ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती के शिष्य बन गए। वर्ष 1955 में महर्षि योगी ने भावातीत ध्यान से लोगों को परिचित कराना शुरू किया।

मूल स्वरूप में कोई परिवर्तन किए बगैर चौरासी कुटिया का जीर्णोद्धार कार्य शुरू कर दिया गया है। डेढ़ साल के भीतर कार्य पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। – शरीन कुमार, सहायक अभियंता, स्मार्ट सिटी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

नॉर्दर्न रिपोर्टर के लिए आवश्यकता है पूरे भारत के सभी जिलो से अनुभवी ब्यूरो चीफ, पत्रकार, कैमरामैन, विज्ञापन प्रतिनिधि की। आप संपर्क करे मो० न०:-7017605343,9837885385