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त्वाडा कुत्ता टॉमी, साडा कुत्ता कुत्ता!!


✍🏿पार्थसारथी थपलियाल

कुत्ते की जात, कुत्ते की योनी, कुत्ते की नाक, कुत्ते की तरह भौंकना, कुत्ते की मौत, धोबी का कुत्ता घर का न घाट का, कुत्ते की वफादारी जैसी कितनी ही लोकोक्तियां और कहावतें समाज मे व्याप्त हैं। पहले कुत्ते घरों की रखवाली करते थे या कुत्ते शिकार के काम आते थे। इस दौर में लोग शानोशौकत के लिए अक्सर कुत्ते को पालते हैं। यह कहा जाता है कि कुत्ता सबसे अधिक वफादार जानवर होता है। शायद यही कारण रहा होगा कि जब पांडव स्वर्गारोहण के लिए बदरीनाथ से आगे हिमालय के शिखर की ओर जा रहे थे तब उनके साथ एक कुत्ता भी था। यह नही कि हिमालय में कुत्ते नही होते, होते हैं मारछा भेड़पालक जो सैकड़ों भेड़ों के साथ उत्तरकाशी से सर्दियों के आरंभ से पहले निचली घटियो में उतरते हैं उनके भोटिया कुत्ते भेड़ों की सुरक्षा करते हैं। गांवों में घर घर कुत्ते पाले जाते हैं।

केदारनाथ यात्रा पर कुत्ते के साथ गए यात्री की बात कुछ अलग है। भई! जिसे बच्चे से ज्यादा लाड मिला हो तो मालिक चाहेगा ही कि उसके कुत्ते को भी पुण्य प्राप्त हो। भारत की संस्कृति तो “सर्वे भवन्तु सुखिनः और लोका: समस्त: सुखिनो भवन्तु”, के ज्ञान का उद्गाता रहा है। दूसरी ओर मुआ ये सोशल मीडिया भी न जाने क्यों दूसरे के फटे में टांग घुसेड़ता है? केदारनाथ के कुत्ता यात्री को ट्रॉल कर दिया। ट्रॉल करना कोई बुरी बात तब नही है जब कुतर्क से पैरवी की जा रही हो कुत्ता मालिक यात्री का यह कहना कि वहां कोई लिखित सूचना नही थी कि मंदिर में कुत्ता ले जाने की अनुमति नही है। सुनने में आया कि उस यात्री ने इस मुद्दे पर पुलिस थाने में FIR कर दी। इस कुतर्क से प्रभावित होकर एक आदमी कहने लगा इस आधार पर वह अपनी भेड़ों को केदारनाथ की यात्रा करवाएगा।। मुंडे मुंडे मतिर्भिन्ना।।

इस घटना ने कुत्ते को जानने का मार्ग प्रशस्त किया और हमारा कुत्ता प्रेम जगा। कुत्ता भेड़िया प्रजाति का जानवर है। दुनियाभर में कुत्तों के सैकड़ों नस्लें है। जर्मन शेफर्ड, बुलडॉग,
राजपालयम, भोटिया, गद्दी, बखरवाल, रामपुर हाउंड, मधोल हाउंड, परिया, चिप्पी पराई आदि। सर्वाधिक आवारा कुत्ते पाए जाते हैं। लोग इन्हें लेंडी कुत्ता कहते हैं। लेंडी कुत्ता हमेशा धुत्कार, फटकार और डंडे की मार ही खाता रहता है। कुत्ता संदकृति ने कुत्तों की भी अहमियत बढ़ा दी। नस्ल के अनुसार कुत्ते 5 हज़ार से 3 लाख रुपये तक कीमत में मिल जाते हैं। महंगे कुत्ते से आदमी का स्टेटस बढ़ता है। यह भी पता चलता है कि अफसर ने खूब कमाया है। बेचारे आम आदमी का कुत्ता अपनी कभी अपनी औकात से ऊपर नही उठ पाया। शायद इसीलिए पंजाबी फिल्म “कैरी ऑन जट्टा” (2012) का यह डायलॉग बहुत प्रचलित हुआ- त्वाडा कुत्ता टॉमी साडा कुत्ता कुत्ता। साहब यूं तो कुत्ते की भी क्या योनी घर का न घाट का। रुतबेदार का कुत्ता होने का मौका मिले तो भारत में पूंछ हिलाने वालों की कमी नही।

कुत्ता प्रकरण को कुछ जानकारी परक बनाते हैं। एक कुतिया 60 से 62 दिनों की गर्भावस्था के बाद प्रसव करती है। एक प्रसव में सामान्यतः 6-8 बच्चे पैदा होते हैं। कुत्ते का पिल्ला 8-10 दिनों में आंखे खोलता है। कुत्ते की सूंघने की शक्ति इंसान से 10 हज़ार गुना होती है। आपराधिक मामलों में अपराध के मूल तक पहुंचने में सुरक्षा एजेंसीज खोजी कुत्तों की मदद लेते हैं। कुत्ते की सामान्य आयु 8-10 साल होती है।

भारतीय संस्कृति में कुत्ते को भैरवनाथ का सेवक माना जाता है। शनि की दशा में काले कुत्ते को रोटी खिलाना ग्रह शान्ति का उपाय बताया जाता है। आधुनिक भारतीय घरों में गाय की बजाय कुत्तों को अधिक पाला जा रहा है। संस्कृति का एक पहलू यह भी है कि पहले घरों के बाहर लिखा मिलता था कि “अमुक परिवार आपका स्वागत करता है”। आधुनिक घरों के बाहर लिखा मिलता है “कुत्ते से सावधान”। यह भी पाया जाता है कि कुत्ते को गोद मे और बच्चे को पैदल घुमाया जाने लगा है। भारत मे कुत्ता प्रेम बहुत बढ़ गया है। यह कुत्ता प्रेम ही था कि दिल्ली सरकार के एक बड़े नौकशाह की हनक जगी तो कुत्ता घुमाने के लिए दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम से खिलाड़ियों को शाम 7 बजे बाहर का रास्ता दिखा दिया ताकि साहब अपनी मेम साहिबा के साथ अपने पद का मद जता सकें कि मैडल लाने के लिए अभ्यासरत धावकों की बजाय उनका टॉमी (कुत्ता) ट्रैक पर दौड़ते खिलाड़ियों से ज्यादा अहमियत रखता है। फिर सोशल मीडिया ने ट्रॉल कर दिया। नतीजा पति का ट्रांसफर लेह और पत्नी के अरुणाचल प्रदेश।

दिल ए बेरहम सरकार ने ये भी नही सोचा कि पति पत्नी की 3100 किलोमीटर की दूरी उन्हें “चोर मचाये शोर (1974)” फ़िल्म के इस गाने को गाने के लिए क्यों मजबूर कर रही है-
एक डाल पर तोता बोले एक डाल पर मैना
दूर दूर बैठे हैं लेकिन प्यार तो फिर भी है ना
बोलो है ना, बोलो है ना….

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