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गायत्री महामंत्र के 24 अक्षर मनुष्य के 24 सद्ग्रंथियों को खोलने का काम करते हैं : अमित शाह


केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि स्व से पर तक जो पहुंचाये वही सच्चा ज्ञान है। भारतीय आर्षग्रंथों के बारिकी से अध्ययन, मनन करने एवं जीवन में उतारने से यह ज्ञान विकसित होता है और मनुष्य सफलता की सीढ़ी दर सीढ़ी चढ़ता है।

वे देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में शांतिकुंज की स्वर्ण जयंती वर्ष के अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि मैं चार वर्ष की उम्र से गायत्री मंत्र का उच्चारण, जप करता हूँ। तब मुझे इसके फायदे के बारे नहीं बता था, लेकिन आज मैं अनुभव करता हूँ। गायत्री महामंत्र के24 अक्षर मनुष्य के 24 सद्ग्रंथियों को खोलने का काम करते हैं। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि जिस स्थान पर अनेकानेक गायत्री मंत्र का जप हुआ है, ऐसे स्थान में गायत्री महामंत्र का जप करने से आंतरिक सद्गुण विकसित होने लगता है।

अमित शाह ने कहा, तपोनिष्ठ पूज्य पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने हम बदलेंगे-युग बदलेगा का जो ध्रुव वाक्य दिया है, यह उस हाइवे की तरह है, जहाँ से अपनी इच्छित लक्ष्य तक पहुँचा जा सकता है। अपने जीवन के विभिन्न अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने युवाओं से सच्चे मन से अपने इच्छित दिशा में बढाने में सहायक गायत्री महामंत्र का अवलम्बन करने हेतु आवाहन किया।

कार्यक्रम के अध्यक्ष अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड को देश की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक राजधानी बनाने की दिशा में हम सभी को मिलकर कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि हमारे आराध्यदेव पूज्य पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने हम सभी को निर्भय होकर समाज के हित के लिए कार्य करने की प्रेरणा दी है। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि गायत्री परिवार महामानव बनाने की टकसाल की तरह कार्य कर रहा है। गायत्री परिवार ने जो शिक्षा, दीक्षा एवं ज्ञान हम सभी को मिल रहा है, यह हमारे राज्य को विकसित बनाने की दिशा कारगर होगा।

इस अवसर पर केन्द्रीय गृह मंत्री  शाह  एवं मुख्यमंत्री धामी  सहित मंचालिन अतिथियों को स्मृति चिह्न, युग साहित्य एवं गायत्री मंत्र उपवस्त्र भेंटकर गायत्री परिवार प्रमुख श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी ने सम्मानित किया। इससे पूर्व केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह जी ने वीर शहीदों के स्मारक में बने शौर्य दीवार पर पुष्पचक्र अर्पित कर उनके शहादत को नमन किया।

इससे पूर्व देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या जी ने शांतिकुंज स्वर्ण जयंती वर्ष की कार्ययोजनाओं पर विस्तृत प्रकाश डाला। इस अवसर पर शांतिकुंज के व्यवस्थापक श्री महेन्द्र शर्मा, देसंविवि के कुलपति श्री शरद पारधी, कुलसचिव श्री बलदाऊ देवांगन, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष श्री मदन कौशिक, केबिनेट मंत्री धनसिंह रावत सहित अनेक प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

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