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एक दीपक से डरी दुनिया की सबसे बड़ी सियासी पार्टी


अरुणा आर थपलियाल
उत्तराखंड में भाजपा इतनी कमजोर हो चुकी है कि एक जिला पंचायत अध्यक्ष के आगे खड़े होने में उसकी हालत पतली हुए जा रही है। यदि ऐसा न होता तो विश्व की सबसे बड़ी पॉलिटिकल पार्टी होने का दावा करने वाली भाजपा उत्तरकाशी के दीपक बिजलवान से डर न गई होती। यह भाजपा का डर ही है कि यमुनोत्री क्षेत्र से विधानसभा चुनाव 2022 की ताल ठोकने की आशंका में सत्ताधारी पार्टी भाजपा दीपक बिजलवान के पर काटने के इंतजाम में न जुटती। इसे दीपक का सियासी रसूख ही कहेंगे कि एक बड़ी राजनीतिक पार्टी को उससे मुकाबले के लिए अपना सरकारी तंत्र लगाना पड़ा।

दीपक बिजलवान छात्र राजनीति से मुख्यधारा की सियासत में आए हैं। वह एक तेजतर्रार हरफनमौला नेता की छवि के साथ आगे बढ़े हैं। उन्होंने अपनी इसी छवि से जिला पंचायत सीट पर विजय हासिल की और फिर जिला पंचायत अध्यक्ष भी बन गए। एक सियासतबाज के लिए जो भी गुण चाहिए दीपक में मौजूद है। इसीलिए जब इन विधानसभा चुनाव में दीपक को भाजपा में लाने के लिए कई नेताओं ने प्रयास भी किए। मालूम था कि दीपक यदि अपनी मूल पार्टी कांग्रेस मैं नहीं लौटे तो भाजपा उन्हें अपने पाले में ला सकती है।
करीबियों के मुताबिक दीपक ने हर हाल में विधानसभा चुनाव लड़ने की लड़ने का तय कर लिया था। चाहे वह किसी दल का उम्मीदवार बनते अथवा निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरते। दीपक भाजपा के लिए खतरा थे। भाजपा के मौजूदा विधायक की स्थिति क्षेत्र में बहुत बेहतर नहीं मानी जा रही है। दूसरी ओर दीपक के जनाधार को भुनाने में कांग्रेस ने बाजी मार ली। दीपक मूलत: कांग्रेस के थे लेकिन बाद में निर्दल हो गए।

दीपक पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के काफी करीब रहे हैं। साथ ही कांग्रेस के दूसरे धड़े के रणजीत रावत के भी निकटवर्ती हैं। इसी का फायदा दीपक को मिला है। दीपक ने बीजेपी के ऑफर को दरकिनार कर दिल्ली में जाकर कांग्रेस ज्वाइन कर ली शायद इस आश्वासन के साथ कि संभवत टिकट उन्हीं को मिलेगा।
खैर, कांग्रेस उम्मीदवार किसे बनाती है यह तो समय बताएगा, लेकिन बड़ी हकीकत यह भी है कि तमाम सर्वे में दीपक यमुनोत्री सीट से पहले स्थान पर आए हैं।
विगत दिन दीपक के कांग्रेस में शामिल होने पर उनके स्वागत के लिए यमुनोत्री क्षेत्र में कार्यक्रम रखा गया था जिसमें हरीश रावत मुख्य अतिथि शामिल हुए। हरीश रावत ने दीपक की तारीफ में जो भी कहा उससे भाजपा को यह कंफर्म हो गया कि फरवरी में होने वाले विधानसभा चुनाव में दीपक बड़ी सियासी टक्कर दे सकते हैं।
भयभीत बीजेपी ने दीपक की राह रोकने के लिए एक पुरानी जांच को आधार बनाकर उन्हें जिला पंचायत अध्यक्ष पद से निलंबित कर दिया। अब सवाल यह है कि दीपक के खिलाफ यह जांच की रिपोर्ट तो बहुत पहले ही सुर्खियां बन चुकी थी तब क्यों नहीं भाजपा की सरकार ने उन्हें निलंबित किया। अब ऐन चुनाव मौके पर दीपक का निलंबन साफ बताता है कि भाजपा के अंदर दीपक को लेकर किस कदर भय है।

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