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तो नहीं रहेगी उत्तराखंड में अब पटवारी जी की पुलिस, दरोगा साहब संभालेंगे ग्रामीण इलाकों का डंडा

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अग्रेजों के जमाने की कानून व्यवस्था उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में बदलने जा रही है। इसके तहत राजस्व ग्रामों यानी पटवारी पुलिस व्यवस्था वाले ग्रामों को रेगुलर पुलिस व्यवस्था में तब्दील करने के प्रस्ताव को राज्य कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।

12 अक्तूबर 20220बुधवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक हुई। इस बैठक में 28 प्रस्ताव आए जिनमें से 25 को मंजूरी मिली। अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी और सचिव शैलेश बगोली ने कैबिनेट बैठक की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में पटवारी और कानूनगो जैसे राजस्व अधिकारी ही पुलिसिंग का कामकाज देखते हैं। अब इन गांवों को रेगुलर पुलिस व्यवस्था के अधीन लाया जाएगा। इसके लिए चरणबद्ध ढंग से प्रक्रिया शुरू की जाएगी। पहले चरण में ऐसे गांव को रेगुलर पुलिस के अधीन लाया जाएगा जो थाने के समीप स्थित हैं। ऐसे राजस्व गांवों को रेगुलर पुलिस थाने के अधीन लाने में कोई अतिरिक्त धन व्यय नहीं होगा। पुलिस मुख्यालय से ऐसे गांवों को चिन्हित कर उनका प्रस्ताव भेजने को कहा गया है। दूसरे चरण में प्रदेश के पर्यटन कारोबार और व्यावसायिक गतिविधियों वाले क्षेत्र में छह नए पुलिस थाने और 20 नई पुलिस चौकियां खोलने का प्रस्ताव है। इसके लिए भी पुलिस विभाग से प्रस्ताव मांगा गया है। इसी तरह बाकी के राजस्व गांव भी रेगुलर पुलिस थाने में शामिल किये जाएंगे। बताते चलें कि राजस्व गांवों में हाल के दिनों में अपराध व कानून व्यवस्था को लेकर स्थिति खराब हुई है। उचित प्रशिक्षण के अभाव में पटवारी और कानूनगो अपराध की तफ्तीश या अपराधियों पर सही प्रकार से नजर नहीं रख पाते हैं। अंकिता भंडारी हत्याकांड में भी राजस्व पुलिस की यह कमी सामने आई थी। इस प्रकरण के बाद सरकार पर राजस्व पुलिस व्यवस्था खत्म करने का दबाव है।  नैनीताल हाईकोर्ट भी तीन साल पूर्व के एक फैसले में प्रदेश सरकार को राजस्व पुलिस व्यवस्था खत्म करने को कह चुकी है।

राजस्व पुलिस क्षेत्र को चरणबद्ध रूप से रेगुलर पुलिस व्यवस्था के अधीन लाया जाएगा। पहले चरण में पर्यटन और कारोबार वाले क्षेत्र में 6 थाने और 20 चौकियां खोलने के प्रस्ताव को सरकार ने मंजूरी दी है।” – पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड

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