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दक्षिण की हिंदी : डॉ राजेश्वर उनियाल की कविता


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– बंधुओ, 14 सितंबर 1949 को भारतीय संविधान सभा ने हिंदी को भारत की राजभाषा घोषित किया था, तब से हम प्रतिवर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस का आयोजन करते हैं । इस अवसर पर आपको हिंदी की हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए, मैं अपनी स्वरचित कविता दक्षिण की हिंदी, प्रस्तुत कर रहा हूँ ।

दक्षिण की हिंदी

अब तो हिन्दी भाषा की गंगा,
दक्षिण से बहनी चाहिए,
दक्षिण भारत में हिन्दी की,
गंगोत्री होनी चाहिए ।

नहीं भगीरथ उत्तर का,
दक्षिण से ही लाल जागेगा,
संस्कृत सुता हिन्दी को वह,
विश्व भाषा बनाएगा ।
तमिल तेलुगू कन्नड व मलय,
उत्तर में फैलनी चाहिए,
दक्षिण भारत में हिन्दी की,
गंगोत्री होनी चाहिए ।।

कृष्णा कावेरी गोदावरी सी,
रंगत भी दिखनी चाहिए
चंदन कुमकुम की महक,
उसमें बिखरनी चाहिए ।
विंध्य में भारतीय भाषा की,
त्रिवेणी होनी चाहिए,
दक्षिण भारत में हिन्दी की,
गंगोत्री होनी चाहिए ।।

उत्तर में कथकलि कुचिपुडी,
यक्ष गान भी चाहिए,
दक्षिण में कजरी फगुआ,
बारहमासा होनी चाहिए ।
सागर से हिम शैल तक,
अब तो हिन्दी भानी चाहिए,
दक्षिण भारत में हिन्दी की,
गंगोत्री होनी चाहिए ।।

ज्ञान की हो और विज्ञान की,
राष्ट्र के स्वाभिमान की,
शक्ति और सम्पदा से भरी,
सृष्टिके सम्‍पूर्ण कल्याण की,
शारदा की वीणा से अब तो,
झंकार बजनी ही चाहिए,
दक्षिण भारत में हिन्दी की,
गंगोत्री होनी चाहिए ।।

(#dr_rajeshwar_uniyal राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित साहित्यकार हैं। मुंबई निवासी उनियाल गत वर्ष उप निदेशक राजभाषा के पद से सेवानिवृत हुए हैं। कई टीवी सीरियल के कथा लेखक उनियाल की कई पुस्तके प्रकाशित हो चुकी हैं।

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