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दमुवाढूंगा के लोगो को भूमिधरी का अधिकार नहीं मिला तो होगा बड़ा आंदोलन: बिष्ट

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हल्द्वानी बार एसोशिएशन हल्द्वानी के अध्यक्ष एडवोकेट गोविंद बिष्ट ने दमुवाढूंगा खाम जवाहर ज्योति के क्षेत्रवासियों के साथ पत्रकार वार्ता कर जानकारी दी कि1952 में दमुवाढूंगा में बसासत शुरू हुई। फिर 1972 में जवाहर ज्योति इलाका जुड़ने के बाद दमुवाढूंगा खाम ग्राम सभा का गठन हुआ। तभी से यहां के क्षेत्रवासी ग्राम पंचायत, विधानसभा, लोकसभा के लिए मतदान करते आए हैं। इतना ही नहीं दमुवाढूंगा खाम से ग्राम प्रधान, बीडीसी व जिला पंचायत सदस्य चुने गए। उन्होंने कहा कि 1956 में इसे आरक्षित वन क्षेत्र बनाया गया। तब नित्यानंद भट्ट ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी और उनकी जमीन आरक्षित वन क्षेत्र से डिनोटिफाई हो गई। 1993 में वन विभाग ने फिर दमुवाढूंगा खाम की 643 एकड़ भूमि को वन क्षेत्र बनाने की कार्यवाही शुरू की। एडवोकेट बिष्ट ने कहा कि पिछली कांग्रेस की सरकार में डॉ. इंदिरा हृदयेश के अथक प्रयासों से 2014 में दमुवाढूंगा खाम को नगर निगम में शामिल किया गया। विजय चंद्र को नामित पार्षद बनाया गया। साल 2016 में इस भूमि को वन से डिनोटिफाई किया गया और उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश और भूमि व्यवस्था एक्ट 1950 की धारा 131 में असंक्रमणीय अधिकारी दिया गया। इसमें भूमि पर कोई भी काबिज व्यक्ति कम से कम 10 साल तक उक्त भूमि को नहीं बेच सकता है। उन्होंने बताया कि इस शासनादेश को जारी हुए पांच साल होने को है लेकिन क्षेत्रवासियों को अभी तक भूमिधरी का अधिकारी नहीं दिया गया है। यदि 15 दिनों के भीतर दमुवाढूंगा जवाहर ज्योति के क्षेत्रवासियों को भूमिधरी का अधिकार नहीं दिया जाता है तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।

दमुवाढूंगा के पहले नामित पार्षद विजय चंद्र उर्फ पप्पू ने कहा कि अभी तक जितनी भी सरकारें आई उन्होंने सिर्फ भूमि के मालिकाना हक को लेकर घोषणाएं की हैं लेकिन शासनादेश जारी नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि अब जब भी कोई मंत्री यहां आए तो शासनादेश लेकर आए, कोरी घोषणा करने नहीं आए। यदि कोई घोषणा के लिए आता है तो उसका विरोध किया जाएगा। इस दौरान वार्ड 36 की पार्षद चंपा, वार्ड 35 के पार्षद प्रतिनिधि देवेंद्र कुमार, लक्ष्मीकांत, लाल सिंह पंवार, रंजीत सिंह डसीला, बबलू बिष्ट, शंकर कोहली, जीवन बिष्ट, प्रदीप बिष्ट, अजय चंद्र आदि शामिल थे।

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