• Thu. Aug 27th, 2026

Northern Reporter

No.1 news portal of India

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन: पहाड़ पर दौड़ेगी रेल, बदलेगी उत्तराखंड की तकदीर और तस्वीर

Spread the love
उत्तराखंड के दुर्गम पर्वतीय इलाकों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने के लिए केंद्र और राज्य सरकार का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट ‘ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना’ अब अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर चुका है। 125 किलोमीटर लंबी यह रेल लाइन न केवल उत्तराखंड की यात्रा को सुगम बनाएगी, बल्कि राज्य के सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य को बदलने में भी मील का पत्थर साबित होगी।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस परियोजना की प्रगति पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में हमारी डबल इंजन सरकार देवभूमि उत्तराखंड को आधुनिक, सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है और अब अपने अंतिम चरण की ओर अग्रसर है। परियोजना के पूरा होने से पर्वतीय क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को नई मजबूती मिलेगी, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर भी सृजित होंगे।

आसान और सुरक्षित यात्रा

ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक सड़क मार्ग से सफर तय करने में जहां 6 से 7 घंटे का समय लगता है, वहीं रेल लाइन शुरू होने के बाद यह दूरी सिमटकर मात्र 2 से 2.5 घंटे की रह जाएगी। बरसात और भूस्खलन के दौरान बंद होने वाली सड़कों की समस्या से भी राहत मिलेगी।

चारधाम यात्रा और पर्यटन को बढ़ावा

यह लाइन बद्रीनाथ और केदारनाथ जाने वाले श्रद्धालुओं के मार्ग को बेहद सुगम बनाएगी। श्रीनगर, देवप्रयाग, रुद्रप्रयाग और कर्णप्रयाग जैसे प्रमुख स्टेशनों से कनेक्टिविटी बढ़ने के कारण होम-स्टे, होटल, गाइड और परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों की आय में भारी उछाल आएगा।

पलायन पर रोक और रोजगार के अवसर

 

पर्वतीय इलाकों में लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और स्थानीय उत्पादों (जैसे मडुआ, सेब, जड़ी-बूटियां) के व्यापार को नया बाजार मिलेगा। जब पहाड़ों में व्यापार और स्वरोजगार बढ़ेगा, तो युवाओं को काम की तलाश में मैदानी इलाकों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा।

सामरिक और आपातकालीन बढ़त

 

चीन सीमा के निकट होने के कारण यह रेलवे लाइन केवल यात्रियों के लिए ही नहीं, बल्कि भारतीय सेना की त्वरित आवाजाही और रसद आपूर्ति के लिए भी रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। साथ ही, आपातकालीन चिकित्सा स्थिति में पहाड़ों से मरीजों को ऋषिकेश या एम्स देहरादून तक पहुंचाना काफी आसान हो जाएगा।

 

इंजीनियरिंग की अनोखी मिसाल

लगभग 125 किलोमीटर लंबी इस परियोजना का 100 किलोमीटर से अधिक हिस्सा सुरंगों से होकर गुजरता है। इस लाइन पर 12 नए स्टेशन बनाए जा रहे हैं, जो गढ़वाल के प्रमुख धार्मिक और प्राकृतिक स्थलों को जोड़ेंगे। इस ड्रीम प्रोजेक्ट के पूर्ण होने से उत्तराखंड केवल आध्यात्मिक केंद्र ही नहीं, बल्कि ढांचागत विकास और आधुनिक कनेक्टिविटी का भी एक बड़ा उदाहरण बनकर उभरेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *