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वृद्धाश्रम में तालाबंद रोते मिले बुजुर्ग, देखरेख के लिये तैनात कर्मचारी भी मिला नदारद


चमोली जिले में समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित वृद्धाश्रम में ताले में बंद बुजुर्ग रोते बिलखते मिले। देखरेख के लिये तैनात पीआरडी कर्मचारी इन वृद्धों को कमरे में बंद कर गायब पाया गया। यह अलग बात है कि विभागीय अधिकारी दावा कर रहे हैं कि बुजुर्गों की सहमति के बाद ताला लगाया गया। लेकिन, लाचार बुजुर्गों के साथ की गई यह हरकत किसी भी रूप में स्वीकार नहीं की जानी चाहिए।

सरकार ने निराश्रित और अशक्त वृद्धजनों के आवास और भोजन की व्यवस्था के लिये वृद्धाश्रमों की स्थापना की है। इनके संचालन का जिम्मा समाज कल्याण विभाग को दिया गया है। ऐसा ही एक आश्रम गोपेश्वर में भी है। गोपेश्वर वृद्धाश्रम में इन दिनों यहां 5 बुजुर्ग निवास कर रहे हैं, जिनकी देखरेख के लिये विभाग ने पीआरडी जवान मनोज कुमार की तैनाती की है।

3 अक्टूबर रविवार दोपहर को नगर पालिका सभासद लीला देवी यहां वृद्धों को फल देने पहुंची तो उन्होंने इन बुजुर्गों को कमरे में बंद रोता पाया। उन्होंने तत्काल मामले की जानकारी जिला समाज कल्याण अधिकारी के साथ ही अन्य लोगों को दी।

बुजुर्गों के कमरे में बंद किए जाने की सार्वजनिक होते ही अफसरों में हड़कंप मच गया। विभागीय अधिकारी आनन-फानन में वृद्धाश्रम पहुंचे। अधिकारियों ने बताया कि वृद्धाश्रम में महिला पीआरडी जवान की तैनाती की गई थी। उनकी सेवाएं विभाग ने 19 सितम्बर को समाप्त कर दी। अधिकारियों ने आरोप लगाया कि उक्त पूर्व पीआरडी महिला कर्मी ने बीते दिनों वृद्धाश्रम में आकर बुजुर्गों के साथ मारपीट की थी। इसलिए यहां तैनात पीआरडी जवान मनोज जब खाना खाने गया तो उसने सुरक्षा को देखते हुए बुजुर्गों की सहमति ले ली थी। इसके बाद ही उन्हें कमरे में बंद वह खाना खाने गया। बेसहारा बुजुर्ग मजबूर हैं, इसी कारण वृद्धाश्रम में रह रहे हैं। ऐसे में उनके पास पीआरडी जवान की बात मानने के सिवा चारा भी क्या था। इसी प्रकार अकेले पीआरडी जवान मनोज की अलग मजबूरी है, वह अपने जरूरी काम से इधर उधर भी जाए तो जाए कैसे!

ऐसे में वृद्धाश्रम संचालन को लेकर समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों की संवेदहीनता का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। अफसरों को इंसान बनकर व्यवहारिक तौर से सोच रखनी चाहिए। आश्रम में कर्मचारियों की संख्या बढ़ानी चाहिए।

वृद्धाश्रम में पूर्व में तैनात पीआरडी महिला जवान बबीता देवी की संस्था में बीती 19 सितम्बर को सेवा समाप्त कर दी गई थी। जिसके बावजूद उनके वृद्धाश्रम कैंपस में आकर अभद्रता करने की बात सामने आई है। उन्हें सोमवार सुबह तक कैंपस खाली करने के निर्देश दिये गये हैं। यदि पीआरडी जवान की ओर से आदेशों का पालन नहीं किया जाता तो मामले में नियमानुसार पुलिस में शिकायत कर कार्रवाई की जाएगी। टीआर मलेठा, समाज कल्याण अधिकारी, चमोली।

 

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