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कांग्रेस का राजतिलक करने के लिए ठीक उसी तरह लोग जुटे जिस तरह….


✍️राजीव महर्षि
उत्तराखंड की जनता इस बार कांग्रेस को अपने आशीर्वाद से राजतिलक की तैयारी कर चुकी है। यह पहला मौका है जब लोग खुद ब खुद कांग्रेस की मदद कर रहे हैं। यह पूरे चुनाव अभियान के दौरान दिखा है। इसके विपरीत भाजपा के सीएम पुष्कर सिंह धामी को लोगों के दर पर अंतिम समय तक दरयाफ्त करते देखा गया है। इसके विपरीत कांग्रेस के उम्मीदवारों को जनता खुद समर्थन दे रही है। गढ़वाल और कुमाऊं दोनों मंडलों में यह बात साफ दिखी है कि कांग्रेस का राजतिलक करने के लिए ठीक उसी तरह लोग जुटे जिस तरह लंका गमन से पूर्व सेतु निर्माण में गिलहरी तक अपने शरीर पर रेत लाकर सेतु के ऊपर झाड़ कर अपना योगदान दे रही थी कि कल उसे यह न कहा जाए कि सौ योजन समुद्र पर सेतु बनाने में उसका कोई योगदान नहीं है।

चार धाम चार काम के ध्येय वाक्य के साथ लोगों के सामने गई कांग्रेस पार्टी को प्रदेश की जनता ने भरपूर स्नेह दिया है। प्रदेश के अबाल वृद्ध, नर नारी सब परिवर्तन के भागीदार बनने के लिए पहली बार नजर आए हैं। इस दृष्टि से यह चुनाव कई संदर्भों में अलग है। एक ओर अभिमानी भाजपा का धन बल है, दूसरी ओर जन बल के साथ कांग्रेस है। रामायण का वह प्रसंग सहज ही स्मरण हो आता है जब राम नाम लिखे पत्थर तैरने लगते हैं। ठीक उसी तरह जिस तरह तुलसीदास ने वर्णन किया है-
जिस पर कृपा करें राम, वे पत्थर भी तिर जाते हैं,
बाधाओं के सारे पत्थर राम हटा देते हैं।

कमोबेश पूरे प्रदेश में यह दृश्य सर्वथा देखा जा रहा है। सन्साधनो के सीमित होने के बावजूद कांग्रेस पहली बार चुनाव अभियान थम जाने के बाद आश्वत है कि जनता उसे उसे प्रदेश की बागडोर सौपने जा रही है। यह विश्वास यूँ ही नहीं है बल्कि उत्तराखण्ड राज्य स्थापना के बाद पहली बार लोग उसे विजयश्री से नवाजने के लिए तत्पर दिखें हैं। राजनीतिक प्रबंधन के अपने पूरे अनुभव के आधार पर मैं कह सकता हूँ कि भाजपा ने राज्य की जनता को जिस तरह निराश किया और कांग्रेस की पिछली सरकार के लोक कल्याण के कार्यों को रोक कर सत्ता का जो तांडव किया, उससे लोगों को उम्मीद की किरण कांग्रेस में ही दिखती है। ऊपर से महगांई, बेरोजगारी से त्रस्त जनता को राहत की जरूरत है।

कोरोना के काले कालखंड में लोगों ने जो लाचारी झेली, कुम्भ में जिस तरह भ्रष्टाचार हुआ, स्वरोजगार के नाम पर जो तमाशा हुआ, वह किसी से छिपा है क्या? सीएम स्वरोजगार योजना का जो ढोल भाजपा सरकार ने पीटा, उसकी पोल अब खुल रही है कि सीएम पोर्टल पर लाखों लोगों ने आवेदन किया लेकिन योजना का लाभ तीन सौ लोगों को भी नहीं मिला जबकि साढ़े तीन लाख से ज्यादा प्रवासी प्रदेश में लौटे थे और सात लाख नौजवान पहले से रोजगार के लिए बाट जोह रहे थे। अलबत्ता डबल इंजन का झुनझुना थमा कर भाजपा भावनाओं से खिलवाड़ करती रही।

इन्हीं सब कारणों से प्रदेश के लोग सेतु निर्माण के भागीदार बन कर अपना योगदान देते हुए गिलहरी प्रयास कर रहे हैं। इस हालत में कांग्रेस के राजतिलक में किसी तरह के संशय की कोई गुंजाईश नहीं रह जाती है। देरी है तो सिर्फ 10 मार्च को मतों की गिनती होने तक की। जनता जान रही है कि उसके कष्ट के अब कुछ ही दिन शेष रह गए हैं। यानी दुःख भरे दिन बीते रे भैया, अब सुख आयो रे, रंग जीवन में नया आयो रे।(लेखक कांग्रेस के सीनियर लीडर हैं)

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