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पार्थसारथि थपलियाल

भारत मे अधिकतर लोगों को यह ज्ञान नही कि बताने, बोलने, कहने, चिल्लाने और भौंकने में शब्दों का ही अंतर नही बल्कि क्रिया का भी अंतर है, भावना और संस्कृति का भी अंतर है।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 (1) में वर्णित स्वतंत्रता को लोग ऐसा मॉन लेते हैं जैसे अभिव्यक्ति स्वच्छंदता हो। धंधेबाज मीडिया चेंनल जो अपने न्यूज़ एंकर को लाखों रुपये का पैकेज देते हैं ताकि वे दर्शकों के मंतव्य को अपने अनुसार तैयार कर सकें। इसका असर यह होगा कि लोग उस तमाशाई चैनल को ज्यादा देखेंगे, और उनका टेलिविजन रेटिंग पॉइंट बढ़ेंगे। इसलिए अपने पैनल ग्रुप डिस्कशन में धुर विरोधियों को बुलाते हैं ताकि युद्ध की स्थिति बन जाय। बिल्कुल नवाबों के ज़माने में दो मुर्गों को लड़ाने की तरह।

वातावरण को इतना अभद्र बना दिया जाता है कि कोई भी पक्ष आपे से बाहर हो सकता है। अनुराग भदौरिया और संवित पात्रा, शोएब जमई और संगीत रागी की डिबेट्स को देखें/सुने तो ये लगता है इस आग में घी डालने का काम न्यूज़ एंकर करते/करती है। रागिनी शर्मा, अभय दुबे, प्रिंयनक चतुर्वेदी, मौलाना देलहवी आदि। मुझे मालूम है निजी जीवन मे ये सभी लोग भद्र हैं। मीडिया ने इन जैसे प्रवक्ताओं/ वक्ताओं की छवि ऐसी ही बना दी। इस छद्म को पहचानना बहुत जरूरी है। आदमी जब बोलता है केवल आवाज़ ही नही निकालता है, उसकी दैहिक भाषा भी बोलती है और भाव भंगिमा भी। सूचना सम्प्रेषण को धंधा बनाकर अपवित्र कर दिया धंधेबाजों ने।

हाल ही में नूपुर शर्मा के जिस कथन पर बवाल मचा है उसी बात को अनेक मुस्लिम धर्म गुरुओं ने अपने वीडियोज़ में कहा हुआ है। इस घटना के एक सप्ताह बाद कानपुर की दंगाई घटना को नूपुर के कथन का प्रतिफल बताया गया। जिन लोगों ने हिन्दू मंदिरों को अपवित्र किया, ईश निंदा की उनके बारे में किसी ओर से संज्ञान नही लिया गया। यह अनियंत्रित मीडिया की स्वच्छंदता का परिणाम है जो स्वतंत्रता शब्द को स्वच्छन्दता में लपेटकर टीआरपी बनाना चाहता है।

बात तो यह भी है कि जमीयत उलेमा ए हिन्द के अध्यक्ष मौलाना मदनी ने देवबंद में हिंदुओं को भारत से कहीं और चले जाने के लिए कहा तब मीडिया अमल (अफीम का घोल) खाये हुए था?
नूपुर शर्मा की अभिव्यक्ति को हेट स्पीच बताकर उसे ईश निंदा तक उस वर्ग ने पहुंचाया जिसने दूसरे वर्ग की भावना को कभी सम्मान नही दिया और इस मसले को इस्लामिक मंच तक पहुंचा दिया। भारत की एक अवैध संतान भी है। वह संतान इस घटना को उत्सव की तरह मना रही है। नूपुर शर्मा पर कार्रवाई का असर ये हुआ कि हेट स्पीच करने वाले करीब 31 व्यक्तियों के विरुद्ध दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज कर दी है। रास्ता जिन्होंने बताया है, वे गर्मी में थे। AC का प्रबंध दिल्ली पुलिस कर रही है। हाल ही में पंजाब में भारत विरोधी कुछ दंगे और प्रदर्शन हुए। उनके पीछे किसान आंदोलन को प्रमोट करनेवलों की मंशा थी जिनकी जड़ें विदेशों में हैं।

कहते हैं चोर से पहले चोर की माँ को पकड़ो। चोर की माँ का नाम है “विदेशी फंडिंग”। बछिया भी खूंटे के बल पर ही कूदती है। खूंटा उखाड़ दो तो बछिया कूदना छोड़ देगी। इस खूंटे का नाम है “विदेशी अंशदान नियमन अधिनियम 2010″। इसके कारण भारत मे अनाप सनाप धन कट्टरपंथी संगठनों, नक्सलवादियों, और भारत विरोधी तत्वों को मिलता है। दूसरा रास्ता है हवाला का। जिस दिन इन दो रास्तों को बंद कर दिया जाएगा उस दिन सामाजिक गर्मी में कश्मीर जैसी ठंडक महसूस होने लगेगी। कुछ लोगों को खुश नही हो जाना चाहिए कि कुछ देशों ने अपना विरोध जताया है याद रखने का बिंदु यह भी है कि इंसान पीठ की मार सह लेता है मगर पेट की मार सहन नही कर सकता। जिस दिन भारतीय मीडिया सभ्य हो जाय और हवाला व विदेशी फंडिंग वाला कानून पर रोक लग जायेगी, उस दिन भहरत की आधी समस्याएं हल हो जाएंगी।

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