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देहरादून नगर निगम में दाखिल खारिज की दरें घटी तो स्ट्रीट लाइट,कूड़ा उठान और कैंट इलाकों ने मचाया बवाल


देहरादून: देहरादून नगर निगम की साढ़े सात घंटे चली बोर्ड बैठक में खूब बवाल रहा। कई मुद्दों पर पार्षदों ने हंगामा काटा। पार्षदों का सबसे ज्यादा गुस्सा स्ट्रीट लाइटों और घर-घर से कूड़ा उठान पर रहा। पार्षदों ने सीधे तौर पर नगर निगम प्रशासन और इन कामों को कर रही कंपनियों पर निशाना साधा। बैठक के ऐजेंडे में शामिल 26 प्रस्तावों पर चर्चा कर 23 प्रस्ताव पास हुए। विरोध के चलते गांधी पार्क की जमीन मेट्रो रेल को देने और कैंटों के सिविल क्षेत्रों को शामिल करने के प्रस्ताव का विरोध होने पर ये दोनों प्रस्ताव खारिज हो गए।

मेयर सुनील उनियाल गामा की अध्यक्षता में बैठक में एक-एक प्रस्ताव पर चर्चा की गई। स्ट्रीट लाइटों से जुड़े प्रस्ताव पर पार्षदों ने हंगामा काटते हुए कहा कि वार्डों में लाइटें खराब हैं। सैकड़ों बिजली के पोलों पर लाइटें नहीं हैं। शिकायत करने पर भी लाइटें समय पर ठीक नहीं होती हैं। जिसके चलते तय हुआ कि स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत और रखरखाव के लिए सेंट्रल कंट्रोल मॉनिटिरंग सिस्टम की स्थापना की जाएगी। ये काम आउटसोर्स पर होगा। सालाना सात से आठ करोड का खर्च आएगा। नगर आयुक्त ने बताया कि शहर में 99000 स्ट्रीट लाइटें हैं, जिसमें से 65000 लाइटें स्विच के सहारे जलती हैं जो कि आए खराब होती रहती हैं। वहीं घर-घर से कूड़ा उठान के यूजर शुल्क की वसूली और इस काम की निगरानी का काम एनजीओ को देने के प्रस्ताव पर पार्षद भड़क गए। पार्षदों ने कहा कि कंपनियों की कूड़े की गाड़ियां तीन दिन में वार्डों में आती है। ऐसे में कंपनी इसकी एवज में यूजर चार्जेज लोगों से ले रही है तो कंपनी को ये काम करना होगा। ऐसे में प्रस्ताव पास नहीं हुआ और मेयर ने कमेटी गठन करने का फैसला लिया। इसके अलावा पार्षदों की ओर से अपने अपने वार्डों को लेकर सड़क, नाली आदि के प्रस्ताव लगाए गए थे जो कि एजेंडे से अलग थे। तय हुआ कि बजट के मुताबिक इन प्रस्तावों को लेकर काम होगा।


कैंट इलाकों पर भाजपा-कांग्रेस दोनों ने जताया ऐतराज :
मेट्रो नियो परियोजना के लिए गांधी पार्क की 3515.25 जमीन उत्तराखंड मेट्रो रेल को देने का प्रस्ताव जैसे ही अधिकारियों की ओर से सदन में रखा गया तो कांग्रेस के साथ ही भाजपा के पार्षदों ने विरोध दर्ज कर दिया। एक सुर में पार्षदों ने कहा कि शहर के बीचों बीच बड़ा और ग्रीनरी वाला पार्क है। क्या इस पार्क की सूरत भी बिगाड़नी है। विरोध के चलते प्रस्ताव निरस्त कर दिया गया।
ऐसे ही कैंटों के सिविल क्षेत्रों के नगर निगम में शामिल करने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई। इस प्रस्ताव पर भाजपा और कांग्रेस के पार्षदों ने कहा कि 60 से 100 वार्ड होने के बाद ये तो संभल नहीं रहे हैं। पहले से ही वार्डों में समस्याएं हैं। ऐसे में कैंटों के सिविल क्षेत्रों को निगम में शामिल करने का कोई ओचित्य नहीं हैं। प्रस्ताव खारिज कर दिया गया।

दाखिल खारिज की दरें की गई आधी : नगर निगम की ओर से कुछ महीने पहले म्यूटेशन शुल्क की दरों को काफी बढाया दिया गया था। जिसका पार्षदों से लेकर वकीलों ने विरोध किया था। म्यूटेशन शुल्क की दरें कम करने का प्रस्ताव एजेंडे में नहीं था। पार्षदों की मांग पर मेयर ने म्यूटेशन शुल्क की दरें 50 फीसदी कम करने का प्रस्ताव पास कर दिया गया।

वेडिंग जोन में 50 फीसदी लोकल आरक्षण : शहर में बनने वाले वेडिंग जोन में 50 फीसदी जगह स्थानीय लोगों को देने का फैसला मेयर ने लिया है। उक्त प्रस्ताव धर्मपुर वार्ड के पार्षद अमित भंडारी ने उठाया था। वेडिंग जोन में शौचालय और पेयजल की सुविधा भी होगी। शहर में वेडिंग जोन बनाने के लिए पांच करोड़ स्वीकृत किए गए हैं। साल 2016 में ठेलियों की संख्या 2600 के करीब थी जो कि अब बढकर करीब 10 हजार तक हो गई है।

दो बीघा जमीन दें,स्वच्छता पार्क बनेंगे : नथुवावाला वार्ड की तर्ज पर अब और वार्डों में भी स्वच्छता पार्क बनाए जाएंगे। इसके लिए नगर आयुक्त ने पार्षदों से अपने वार्ड में करीब दो बीघा खाली नगर निगम की जमीन का प्रस्ताव मांगा है। वहीं आठ करोड़ की लागत से शहर में पांच बड़े पार्क बनाए जाएंगे। इन पार्क में बच्चों के खेलने के लिए झूले, राज्य की संस्कृति, फाउंटेन थीम आदि होगा।

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