उत्तराखंड में सरकारी जमीनों को नीलामी और दीर्घकालीन लीज के माध्यम से निजी एवं व्यावसायिक उपयोग के लिए दिए जाने के विरोध में विभिन्न सामाजिक और जन संगठनों ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ज्ञापन भेजकर उत्तराखंड इन्वेस्टमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड (यूआईआईडीबी) को तत्काल भंग करने और सरकारी जमीनों की बिक्री, नीलामी व लीज पर रोक लगाने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि निवेश बढ़ाने के नाम पर यूआईआईडीबी के माध्यम से सरकारी विभागों की हजारों बीघा जमीन निजी और व्यावसायिक परियोजनाओं के लिए उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। इसमें होटल, रिसॉर्ट, स्पा एवं वेलनेस सेंटर, आवासीय कॉलोनी समेत अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए जमीन दिए जाने की तैयारी का दावा किया गया।
7000 बीघा जमीन से जुड़े प्रस्तावों पर उठाए सवाल
वक्ताओं ने करीब 7000 बीघा सरकारी जमीन से जुड़े प्रस्तावों और प्रक्रियाओं पर सवाल उठाते हुए सरकार से पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि अब तक कितनी सरकारी जमीन किस विभाग से, किस संस्था या व्यक्ति को, किस उद्देश्य और किन शर्तों पर दी गई है। प्रदर्शनकारियों ने सरकारी जमीनों के आवंटन, नीलामी, बिक्री और लीज से संबंधित श्वेतपत्र जारी करने की मांग भी की।
स्थानीय उद्यमियों को प्राथमिकता देने की मांग
संगठनों ने कहा कि निवेश और रोजगार बढ़ाने के नाम पर जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रियाओं में निर्धारित पात्रता और आर्थिक शर्तें इतनी बड़ी हैं कि स्थानीय युवा, उद्यमी और छोटे कारोबारी प्रतिस्पर्धा नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने सरकार से ऐसी नीति बनाने की मांग की, जिसमें स्थानीय युवाओं, उद्यमियों, महिला समूहों, सहकारी संस्थाओं और छोटे-मध्यम कारोबारियों को प्राथमिकता मिले।
वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड की जनता लंबे समय से भू-कानून और प्राकृतिक एवं भूमि संसाधनों की सुरक्षा को लेकर आवाज उठा रही है। ऐसे में सरकारी जमीनों को बड़े व्यावसायिक प्रोजेक्टों के लिए उपलब्ध कराने की प्रक्रिया चिंता का विषय है।
मांगें नहीं मानीं तो प्रदेशभर में आंदोलन की चेतावनी
ज्ञापन में यूआईआईडीबी के माध्यम से सरकारी जमीनों से संबंधित सभी प्रक्रियाओं को सार्वजनिक करने, प्रस्तावित नीलामी और लीज पर रोक लगाने तथा पूरे मामले की पारदर्शी समीक्षा की मांग की गई। साथ ही पूर्व में सरकारी जमीनों के किए गए आवंटन और लीज की भी समीक्षा कर इसकी जानकारी सार्वजनिक करने को कहा गया।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि निर्धारित समय सीमा में मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को देहरादून तक सीमित नहीं रखा जाएगा। विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और जन संगठनों को साथ लेकर प्रदेशभर में आंदोलन शुरू किया जाएगा।
प्रदर्शन में उत्तराखंड महिला मंच की संयोजक कमला पंत, मूल निवास-भूकानून संघर्ष समिति के संस्थापक संयोजक मोहित डिमरी, जिला संयोजक निर्मला बिष्ट, अनिल डोभाल, विमला कोली, मंजू बलोदी, विजया नैथानी, आशीष नौटियाल, नंद किशोर नौटियाल, अमित परमार, अंबुज शर्मा और मुरली सिंह रावत आदि मौजूद रहे।
हजारों बीघा सरकारी जमीन निजी इस्तेमाल के लिए देने के विरोध में प्रदर्शन, यूआईआईडीबी भंग करने की मांग
