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उत्तराखंड पेयजल विभाग ने अपने ऑनलाइन मीटिंग में जल जीवन मिशन से जुड़े ठेकेदारों का जमकर किया उत्पीड़न।

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जल जीवन मिशन के कार्यों से जुड़े परेशान ठेकेदारों को धन मिलने की सारी उम्मीदें ध्वस्त दिखती नजर आ रही है। उत्तराखंड पेयजल निगम ने अपने अधिकारियों और ठेकेदारों के साथ ऑनलाइन मीटिंग किया एवं इस मीटिंग में काम बंदी से मना करते हुए काम न करने पर पेनल्टी और अनुबंध निरस्त करने का दबाव बनाया। देवभूमि जल शक्ति कांट्रेक्टर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष अमित अग्रवाल ने कहा ” इन दबाव से जल जीवन मिशन से जुड़े सभी ठेकेदार जो बैंक का ब्याज एवं सप्लायर, लेबर कॉस्ट का भुगतान नहीं कर पा रहे हैं उन सभी को मानसिक आघात एवं दबाव पहुंचा है। अब जल जीवन मिशन के ठेकेदारों को जल निगम के अधिकारियों से कोई उम्मीद नहीं दिख रही है, उनकी उम्मीदें अब बस राज्य सरकार और केंद्र सरकार से हैं। उन्होंने कहा जल संस्थान के सीजीएम ने पूर्ण कार्य की सिक्योरिटी और टीपीआई का 25% धनु राशि अबमुक्त करने एवं एक्स्ट्रा बिल आइटम को तुरंत माप पुस्तिका पर लाने का निर्देश दिया है जो ठेकेदारों के लिए इन परिस्थितियों में अच्छी बात है। परंतु उत्तराखंड पेयजल निगम के मुख्य अभियंता द्वारा यही निर्देश फरवरी माह में भी दिए गए थे परंतु आज तक कोई कार्रवाई उसके ऊपर नहीं की गई। उन्होंने कहा कम्युनिटी कंट्रीब्यूशन का 5% पैसा अनुबंध से काटा जाना उचित नहीं हैं क्यूंकि स्कीम का संचालन विभाग द्वारा किया जाएगा, पानी के बिलों की वसूली उन्ही के द्वारा की जानी हैं इसीलिए ठेकेदार के अनुबंध से काटी जानी उचित नहीं हैं। इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए लगता है कि समस्त ठेकेदार जो जल जीवन मिशन से जुड़े हुए हैं धन का आवंटन न होने के कारण काम को पूर्ण करने में सक्षम नहीं है।” सभी सदस्यों ने कार्य न करने में असमर्थता जताई।

देवभूमि जल शक्ति कांट्रेक्टर वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से अध्यक्ष अमित अग्रवाल, उपाध्यक्ष सचिन मित्तल, महासचिव सुनील गुप्ता, शौरभ गोयल, आर के इंजिनियर, पंकज अवस्थी, जितेंद्र मलिक, ध्रुव जोशी इव अन्य सौ से अधिक सदस्य इस ऑनलाइन बैठक के दौरान मौजूद रहे।

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