पौड़ी गढ़वाल की नगर पंचायत सतपुली के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह चौहान की मुश्किलें बढ़ गई हैं। नगर पंचायत के विभिन्न कार्यों में वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बाद शासन ने उनके खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी किया है। साथ ही 23 अक्टूबर से उनके समस्त वित्तीय और प्रशासनिक अधिकारों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी गई है। अध्यक्ष को आरोपों पर अपना पक्ष रखने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। निर्धारित अवधि में जवाब नहीं देने या संतोषजनक स्पष्टीकरण न मिलने की स्थिति में पद से हटाने की विधिक कार्रवाई शुरू की जा सकती है।
जांच में कई मामलों में अनियमितताओं के आरोप
शासन के निर्देश पर जिलाधिकारी पौड़ी गढ़वाल की ओर से कराई गई जांच में प्रथमदृष्टया वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि होने की बात कही गई है। यह कार्रवाई सतपुली निवासी रविंद्र रावत और शशांक घिल्डियाल की संयुक्त शिकायत के आधार पर की गई है।
जांच में आरोप लगाया गया है कि नगर पंचायत अध्यक्ष ने 3.71 लाख रुपये से अधिक की लागत से निर्मित टैक्सी पार्किंग को तकनीकी स्वीकृति और निविदा प्रक्रिया के बिना ध्वस्त कराया। इसके अलावा पार्किंग ठेके की दर 16 हजार रुपये से घटाकर 8200 रुपये करने से निकाय को आर्थिक नुकसान पहुंचाने का आरोप है।
महर्षि वाल्मीकि ट्रस्ट को शासनादेश के बिना 50 हजार रुपये जारी करने और कुंज नयार घाटी मेले में टेंट व साउंड के कार्यों को कृत्रिम रूप से विभाजित कर करीब 9.63 लाख रुपये की अनियमितता के आरोप भी जांच में शामिल हैं। इसके साथ ही दुकानों का नियमविरुद्ध आवंटन, वाहनों के किराये के नाम पर सरकारी धन के दुरुपयोग और निकाय के वाहन के लिए स्वयं या स्वजन के पेट्रोल पंप को भुगतान किए जाने के मामलों पर भी सवाल उठाए गए हैं।
बिना बिल-बाउचर धन निकालने का भी आरोप
जांच में यश टेंट हाउस को एक ही चेक संख्या से कई भुगतान किए जाने को गंभीर वित्तीय अनियमितता बताया गया है। वहीं, आवारा पशुओं और बंदरों से संबंधित मद में 46,800 रुपये में से 38,400 रुपये बिना बिल-बाउचर के अपने खाते में निकालने तथा पूर्व बकाया वसूले बिना पार्किंग का दोबारा आवंटन करने के आरोप भी लगाए गए हैं।
शासन के अनुसार, प्रथमदृष्टया इन मामलों को अधिप्राप्ति नियमावली 2017 एवं 2025, सामान्य वित्तीय नियम (जीएफआर) के नियम 157 और 26 नवंबर 2024 के शासनादेश का उल्लंघन माना गया है। इसी आधार पर उत्तराखंड नगर पालिका अधिनियम, 1916 की धारा 48(2)(क) और 48(2)(ख) के तहत 23 अक्टूबर 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।
डीएम को सौंपी गई जिम्मेदारी
कारण बताओ नोटिस जारी होने के साथ ही अध्यक्ष के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकारों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी गई है। राज्यपाल की स्वीकृति से जिलाधिकारी पौड़ी गढ़वाल को इन अधिकारों के निर्वहन के लिए अधिकृत किया गया है। जिलाधिकारी डिप्टी कलेक्टर से अनिम्न श्रेणी के राजपत्रित अधिकारी को इसके लिए नामित कर सकेंगे।
अध्यक्ष को 15 दिन के भीतर लिखित जवाब देने, साक्ष्य प्रस्तुत करने और व्यक्तिगत सुनवाई का अनुरोध करने का अवसर दिया गया है। इसके बाद शासन उपलब्ध तथ्यों और जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगा।
