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उत्तराखंड के लाल चावल को राष्ट्रीय स्तर पर मिला दूसरा इनाम

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-मुख्यमंत्री पुष्कर धामी के नेतृत्व में राज्य को मिली नई पहिचान
-राज्य में वन डिस्ट्रिक्ट दो प्रोडक्ट पर काम कर रही धामी सरकार
-राज्य को उत्पादों को पहली बार रिकॉर्ड जीआई टैग से जुड़ चुकी बड़ी उपलब्धि

देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की एक जिला दो उत्पाद (वन डिस्ट्रिक टू प्रोडक्ट) मुहिम को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है। उत्तरकाशी के लाल धान की खेती को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर राज्य को द्वितीय पुरस्कार मिला है। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह पुरस्कार राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि है। आगे भी हमें उत्तराखंड के बहुगुणी उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इसी तरह पहचान दिलानी होगी। इधर, इससे पहले एक साथ दो दर्जन से अधिक उत्पादों को जीआई टैग मिलने की उपलब्धि भी राज्य के साथ जुड़ी है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली उत्तराखंड सरकार ने कुछ समय पहले एक जिला दो उत्पाद योजना शुरू की। उत्तराखंड की एक जिला दो उत्पाद योजना का मुख्य उदेश्य हर एक जिले से 2 ऐसे प्रसिद्ध लोकल प्रोडक्ट्स को तलाश करना है जिसको उस जिले से पूरी दुनिया में पहुंचाया जा सके। ऐसा करने से प्रत्येक जिले में स्थानीय उत्पादों को व्यावसायिक रूप से बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों को स्वरोजगार के अवसर भी प्राप्त होंगे। मुख्यमंत्री धामी की इस मुहिम को आगे बढ़ाते हुए उत्तरकाशी के डीएम अभिषेक रुहेला ने पौष्टिक गुणों से भरपूर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अच्छे दाम पर बिकने वाले लाल धान की खेती को बढ़ावा दिया। खासक उत्तरकाशी की यमुनाघाटी के कमल और रामा सेराईं में लाल धान उत्पादित होता है। ऐसे में गंगा घाटी में लाल धान का उत्पादन किया गया। इस बीच नेशनल स्तर पर वन डिस्ट्रिक वन प्रोडक्ट अवार्ड में लाल धान को शामिल किया गया। करीब 500 जिलों के बीच हुए परीक्षण में उत्तरकाशी का लाल धान देशभर में दूसरे स्थान पर रहा। आज नई दिल्ली में आत्म निर्भर भारत उत्सव में केंद्रीय मंत्री डॉ एस जयशंकर के हाथों उत्तरकाशी के डीएम अभिषेक रुहेला को देशभर में दूसरे स्थान का यह सम्मान मिला। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के लिए इसे बड़ी उपलब्धि बताते हुए पूरी टीम को बधाई दी। कहा कि आगे भी इसी टीम भावना से उत्तराखंड के पौष्टिक गुणों से भरपूर उत्पादों को देश दुनिया तक वाकिफ कराएं। ताकि राज्य को पहिचान मिलने के साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सके।

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